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| भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, जिनके कार्यों के कारण उनका जन्मदिन सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है |
बिथान (समस्तीपुर) :
भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर आज प्रखंड क्षेत्र में उत्साह और सम्मान का वातावरण रहा। स्थानीय युवाओं, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर इसे 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करना था, बल्कि उनके द्वारा स्थापित उच्च राजनीतिक मूल्यों और प्रशासनिक सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाना भी था।
पुष्पांजलि और भावपूर्ण स्मरण
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय वाजपेयी जी के तैल चित्र पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान पूरा परिसर 'अटल जी अमर रहें' के नारों से गुंजायमान रहा। उपस्थित लोगों ने उनकी सादगी और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को नमन किया।
बहुआयामी व्यक्तित्व: कवि, राजनेता और पथ-प्रदर्शक
समारोह को संबोधित करते हुए प्रबुद्ध वक्ताओं ने अटल जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अटल जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक प्रखर ओजस्वी वक्ता और अत्यंत संवेदनशील कवि भी थे। उनके भाषणों ने न केवल संसद को प्रभावित किया, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने उनकी प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां साझा करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष और धैर्य की अद्भुत मिसाल है।
सुशासन की मिसाल और ऐतिहासिक कार्य
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा उनके जन्मदिवस को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाना एक सार्थक निर्णय है। अटल जी ने अपने कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, शिक्षा के क्षेत्र में सर्व शिक्षा अभियान और मजबूत विदेश नीति के माध्यम से भारत की तस्वीर बदल दी थी। उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी, जो आज के समय में सुशासन का आधार स्तंभ है।
युवाओं का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित युवाओं ने यह सामूहिक संकल्प लिया कि वे अटल जी के 'राष्ट्र प्रथम' के विचार को अपने जीवन में उतारेंगे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ खड़े होने और सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का वादा किया। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि सभा थी, बल्कि भविष्य के समृद्ध भारत के निर्माण की दिशा में एक वैचारिक मंथन भी साबित हुआ।
रिपोर्ट - Bithan Samachar

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